श्री कृष्ण नाम धुन

राधे राधे, जय श्री राधे 
जय श्री कृष्ण बोलो, राधे राधे

मदन मोहन गोपाल मेरे गिरिधारी
हे केशव घनश्याम गोवर्धन धारी
गिरिधारी मेरे गिरिधारी - २
मदन मोहन गोपाल, मेरे गिरिधारी

हरि सुंदर हरि नन्द मुकुंदा
नारायण हरि ॐ - २

हरि सुंदर हरि नन्द मुकुंदा (टेक)
नारायण हरि ॐ - २

हरि केशव हरि श्री गोविंदा
नारायण हरि ॐ - २

हरि केशव हरि श्री गोविंदा (टेक)
नारायण हरि ॐ - २

हरि सुंदर हरि नन्द मुकुंदा
नारायण हरि ॐ
हरि केशव हरि श्री गोविंदा
नारायण हरि ॐ - ३

हरि सुंदर नन्द मुकुंदा - २
हरि केशव श्री गोविंदा
नारायण हरि ॐ - २

हरि सुंदर हरि नन्द मुकुंदा (टेक)

सच्चिदानंद रूपाय - ३ रूपाय (टेक)

सच्चिदानंद रूपाय
सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम:

सच्चिदानंद रूपाय - २ (टेक)

सच्चिदानंद रूपाय
सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम:

हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे (टेक)

हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे - २

जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी
जय गोपी जन वल्लभ -२, जय गिरिवर धारी

जय राधा माधव - ३, राधे राधे बोल
जय राधा माधव - ३, राधे राधे बोल

जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी
जय गोपी जन वल्लभ, जय गिरिवर धारी

श्री कृष्णं शरणम ममः - ५ (टेक)

शरण में ले लो - ३ मेरे श्याम
मैं आया हूँ शरण तिहारे - २
कर दो मेरा बेड़ा पार
शरण में ले लो - ३ घनश्याम
मैं आया हूँ तेरे द्वारे -२
कर दो मेरा कल्याण
श्री कृष्णं शरणम ममः - ७



शलोक
सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम:
अर्थ
सच्चिदानंद स्वरूप भगवान् श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते हैं , जो इस जगत की उत्पत्ति , स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक , आधिदैविक और आधिभौतिक - तीनों प्रकार के तापों का नाश करनें वाले हैं!