जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी जय गोपी जन वल्लभ -२, जय गिरिवर धारी
जय राधा माधव - ३, राधे राधे बोल जय राधा माधव - ३, राधे राधे बोल
जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी जय गोपी जन वल्लभ, जय गिरिवर धारी
श्री कृष्णं शरणम ममः - ५ (टेक)
शरण में ले लो - ३ मेरे श्याम मैं आया हूँ शरण तिहारे - २ कर दो मेरा बेड़ा पार शरण में ले लो - ३ घनश्याम मैं आया हूँ तेरे द्वारे -२ कर दो मेरा कल्याण श्री कृष्णं शरणम ममः - ७
शलोक सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: अर्थ सच्चिदानंद स्वरूप भगवान् श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते हैं , जो इस जगत की उत्पत्ति , स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक , आधिदैविक और आधिभौतिक - तीनों प्रकार के तापों का नाश करनें वाले हैं!